Friday, October 12, 2018

मां-बाप की वो लत, जो बच्चों के लिए हानिकारक है

ब आप लिटिल थे तो स्कूल में अकसर सुना होगा, अच्छे बच्चे कैसे? जवाब में मुंह पर उंगली रखकर आप कहते होंगे- ऐसे.
मगर तनिक आज़ादी लेते हुए अब पूछा जाए कि अच्छे मां-बाप कैसे? जवाब देने के लिए बचपन में मुंह पर रखी उंगली उठाइए और बताइए.
वो जो आपके हर सुख दुख में साथ दें? जो एक दोस्त की तरह हमेशा आपको समझें? जो आपसे परंपरा, प्रतिष्ठा और अनुशासन वाले मूड में ही बात करें?
या फिर वो जो एक साये की तरह आपके साथ हमेशा रहें. फिर चाहे आप स्कूल के दोस्तों से बैठे बात कर रहे हों. अपने बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के साथ हों. कहीं पार्क में खेल रहे हों या सिनेमाघर में फ़िल्म देख रहे हों और मां या पिता की 'ड्रोन जैसी निगाह' आपका हमेशा पीछा करती रहे.
मां-बाप की ऐसी आदत को हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग कहा जाता है. 12 अक्टूबर को एक्ट्रेस काजोल की फ़िल्म 'हेलिकॉप्टर इला' रिलीज़ हो रही है. इस फ़िल्म की कहानी भी एक मां की इसी आदत के इर्द-गिर्द है. फ़िल्म में काजोल एक सिंगल मदर इला का किरदार निभा रही हैं.
मगर अपने जिगर के टुकड़े को पुचकारने और दुलारने के लिए मन से निकली बातें कब हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग बन जाती हैं? हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग कातिहास और इसके फ़ायदे या नुकसान क्या हैं? हम आपके मन में उभरे इन सवालों का यहां जवाब देने की कोशिश करेंगे.इस टर्म का पहली बार इस्तेमाल साल 1969 में हुआ था. डॉ हेम गिनोट्ट ने अपनी किताब 'पेरेंट्स एंड टीनएजर्स' में इसका ज़िक्र किया था.
किताब में एक बच्चा ये कहता है कि मेरे मां-बाप हेलिकॉप्टर की तरह मुझ पर मंडराते रहते हैं. 2011 में इस टर्म को डिक्शनरी में भी शामिल कर लिया गया.
ऐसा नहीं है कि बच्चों के आसपास मंडराने की इस लत को सिर्फ़ इसी नाम से पुकारा जाता है. लॉनमोवर पैरेंटिंग, कोस्सेटिंग पेरेंट या बुलडोज़ पैरेंटिंग भी ऐसी आदतों के कुछ और नाम हैं.
अब इतिहास से वर्तमान की ओर बढ़ते हैं. आप भी अपने बच्चे की परवाह करते होंगे. लेकिन ये परवाह कब हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग बन जाती है. इसे समझने के लिए एक क्विज़ खेलते हैं...
  • बच्चा खाली वक़्त में क्या करेगा, ये हर बार आप ही तय करते हैं?
  • आप रोज़ बच्चे के 24 घंटों का हिसाब लेते हैं?
अगर इन सभी सवालों में आपका जवाब हां है तो संभवत: आप हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग करते हैं.
एजुकेशन एक्सपर्ट पूर्णिमा झा ने बीबीसी हिंदी से इस मुद्दे पर ख़ास बातचीत की.
पूर्णिमा समझाती हैं, ''हवाई जहाज और हेलिकॉप्टर में फ़र्क़ ये है कि हेलिकॉप्टर आपको हर जगह फॉलो कर सकता है. जब बच्चों को पालते हुए आप भी यही करते हैं तो ये हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग हो जाती है. ज़्यादा फ़िक्र करना या नज़र बनाए रखना इसकी पहचान है. गाने के ज़रिए समझें तो 'तू जहां, जहां रहेगा...मेरा साया साथ होगा' वाला रवैया ही हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग है. बीते पांच या दस सालों में ये काफ़ी बढ़ी है. इसकी वजह असुरक्षा का भाव भी होता है. आज कल आप देख ही रहे हैं कि गुड टच और बैड टच पर इतनी बात हो रही है.''
गुड़गांव में रहने वालीं अल्का सिंगल मदर हैं. फिल्म 'हेलिकॉप्टर इला' में भी काजोल सिंगल मदर के किरदार में है.
हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग पर अल्का कहती हैं, ''मां के सामने जब बच्चा बड़ा होता है तो उसे एहसास नहीं होता कि बच्चा बड़ा हो रहा है, वो बच्चा ही रहता है. बड़े होने के साथ बच्चों को स्पेस चाहिए होता है. इस बीच में मां बच्चे की पैरेंटिंग करती है. बच्चों पर नज़र रखने और परेशान होने के क्रम में एक मोड़ आता है, जब परवाह हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग बन जाती है. मैंने भी ऐसा किया है.''
एक सिंगल मदर के तौर पर हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग किए जाने की संभावनाएं ज़्यादा होती हैं.
अल्का ने कहा, ''हां एक सिंगल मदर के तौर पर हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग ज़्यादा होती है. ज़िम्मेदारियों का बोझ ज़्यादा होता है. औरतें वैसे भी ज़्यादा सोचती हैं तो हम सबसे ख़राब बातों को मन में सोच लेते हैं. जिससे बच्चों को आज़ादी देने में वक़्त लगता है. मेरा मानना है कि बच्चों से डॉयलॉग बनाए रखना चाहिए. बच्चों के हिसाब से थोड़ी सी ढील देनी चाहिए.''

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